Indian History Notes-1


  Indian History Notes-1

              महात्मा बुद्ध एक परिचय



* बौध्द धर्म के संस्थापक

* जन्म -563 ई. पू. कपिलवस्तु के पास लुम्बिनी वन में (नेपाल)



* माता का नाम- महामाया (कोलिय गणराज्य की राजकुमारी )



* माता महामाया का देहांत - बुध्द के जन्म के सातवें दिन ।



* पिता - शुद्दोधन (शाक्य गणराज्य के प्रधान)



* महात्मा बुद्ध की मौसी का नाम -गोतमी ।



* शुध्दोधन ने महामाया की मृत्यु के बाद विवाह किया - गौतमी से।



* गोत्र का नाम - गोतम



* जन्म का नाम - सिध्दार्थ



* महात्मा बुद्ध का लालन-पालन गोतमी ने किया।



* पुत्र का नाम- राहुल (बुध्द के विवाह के 12 वर्ष बाद जन्म)



* बुद्ध का विवाह 16 की अवस्था में हुआ ।



* पत्नी - यशोधरा ,(अन्य नाम तारा, बिम्बा ) कोलिय गणराज्य की कन्या।



* " टुटत ही धनु भयेहु विवाह" यह उक्ति महात्मा बुद्ध के विवाह से जूडी हुई हैं ।



* पुत्र जन्म के समय महात्मा बुद्ध के मुख से निकला शब्द - राहु (बंधन)



* नगर भ्रमण के दौरान भिन्न भिन्न अवसरों पर सिध्दार्थ ने मार्ग में पहले जर्जर शरीर, फिर व्यथा पूर्ण रोगी, फिर मृतक और अंत में संन्यासी को देखा।



* महात्मा बुद्ध ने  29 वर्ष की आयु में ग्रह त्याग कर दिया ।



* महात्मा बुद्ध के ग्रहत्याग की घटना- महाभिनिष्क्रमण



*  मैनयो के नगर अनुवैनेय में सूर्योदय के समय श्रवण वस्त्र धारण किए । (ललित विस्तार के अनुसार)



* बुध्द सर्वप्रथम ज्ञानार्जन के लिए आलारकालाम (वैशाली) के पास गए।



* आलारकालाम से सन्तुष्ट न होने पर बुध्द ज्ञानार्जन हेतु तपस्वी उद्रक रामपुत्त (राजग्रह ) के पास गए।



* संबोधि (ज्ञान)की प्राप्ति - वैशाख पूर्णिमा के दिन गया मे वट वृक्ष के नीचें ।



*ज्ञान प्राप्ति के बाद गया बोधगया तथा वटवृक्ष बोधिवृक्ष कहलाये।



* ज्ञान प्राप्ति के बाद सिध्दार्थ तथागत व बुध्द कहलायें ।



* बुध्द ने पहला उपदेश दिया - तपस्यु व मलिक नामक दो बंजारों को। (बोधगया में ) NCERT के अनुसार सारनाथ में





* पाँच ब्राह्मणो को बौद्ध धर्म की दीक्षा की घटना- धर्मचक्र परिवर्तन।



* बुध्द कालीन शासक - बिम्बिसार व अजातशत्रु ।



* बिम्बिसार ,अजातशत्रु , कौशल नरेंश प्रसेनजित ,वैशाली की प्रसिद्ध गणिका आम्रपाली ,स्वयं बुध्द के पिता व पुत्र उनके शिष्य थे।



* स्त्रियों को दिक्षा शिष्य आनंद के आग्रह पर दी ।





*  बुध्द के अन्य नाम - शाक्य मुनि, गौतम ,तथागत, संबोधि, बौध्दिसत्व ।



* मृत्यु - 483 ई.पू. कुशीनारा (गोरखपुर ,उत्तर प्रदेश)



*मृत्यु के समय आयु - 80 वर्ष की ।





* ज्ञानार्जन हेतु बुध्द रहे- आलारकालाम व उद्रग रामपुत्त के साथ ।





* बुध्द से तात्पर्य - जिसे ज्ञान प्राप्त हो गया ।



* तथागत से तात्पर्य- जिसनें सत्य को जान लिया हो ।



                                 बौध्द धर्म


चार आर्य सत्य -
 (1) दु:ख

(2)दु:ख समुदाय

(3) दु:ख निरोध

(4) दु:ख निरोध का मार्ग



अष्टांगिक मार्ग -

(1)सम्यक दृष्टि

(2)संम्यक संकल्प

(3) सम्यक वाणी

(4) सम्यक कर्मान्त

(5) सम्यक आजीव

(6) सम्यक स्मृति

(7) सम्यक व्यायाम

(8)सम्यक समाधि





* मध्यम मार्ग - न तो शरीर को अत्यधिक कष्ट व न अत्यधिक आराम देना चाहिए ब्लकि इन दोनों के बीच का मार्ग अपनाना।





दस शील -
(1) सत्य बोलना

(2)हिंसा न करना

(3) चौरी न करना

(4) आवश्यकता से अधिक संग्रह नहीं करना

(5) भोगविलास से दुर रहना

(6)नाच गाने का त्याग करना

(7)कुसमय भोजन न करना

(8) सुगंधित प्रदार्थों का त्याग करना

(9) कोमल शय्या का त्याग करना

(10) राग कामिनी कंचन का त्याग करना ।
























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