Political Theory Notes 1

राजनीति विज्ञान का अर्थ एवं परिभाषा ,  क्षेत्र :परम्परागत दृष्टिकोण



राजनीति विषय के जनक का श्रेय यूनानियों को दिया जाता है।
इसके जन्म को प्लेटों के आदर्शवाद और अरस्तू के बुद्धिवाद से अभिसिंचित किया जाता हैं।

परिभाषाएं :-

परम्परागत राजनीतिक विचारक राजनीति विज्ञान के अध्ययन को राज्य ,सरकार, और राजनैतिक संस्थाओं के अध्ययन तक ही सीमित रखा है। 

राज्य से सम्बंधित अध्ययन :- 

गार्नर , ब्लंटश्ली, गेरेज ,एक्टन ,गुडनावं आदि 

(1) गार्नर के शब्दों में,  " राजनीति विज्ञान का प्रारंभ अन्त राज्य के साथ ही होता है । "

2) ब्लंटश्ली के शब्दों में , " राजनीति विज्ञान वह विज्ञान है जिसका संबंध राज्य से है और जो उसकी परम आवश्यक प्रकृति, आधारभूत स्थिति तथा विविध स्वरूप एव विकास को समझने का प्रयास करता है ।"

3) गेरेज के शब्दों में , " राजनीति विज्ञान राज्य के उद्भव ,विकास ,उद्देश्य तथा समस्त राजकीय समस्याओं का उल्लेख करता है "

4) एक्टन के शब्दों में , "राजनीति विज्ञान राज्य तथा उसके विकास के लिए अनिवार्य दशाओं से सम्बद्ध है ।"

5) गुडनावं के शब्दों में , " राजनीति विज्ञान उस संगठन का अध्ययन करता है जिसे राज्य कहते है ... यह राज्य की स्थिर और प्रगतिशील - दोनों अवस्था का अध्ययन करने वाला विज्ञान हैं । "

सरकार  से सम्बंधित अध्ययन :-

जॉन सीलें ,लीकॉक ,जेम्स आदि 

1) जेम्स के शब्दों में , " राजनीति विज्ञान राज्य का विज्ञान है तथापि राज्य मे सरकार का अध्ययन अन्तर्निहित है ।"

2) लिकॉक के शब्दों में , " राजनीति विज्ञान सरकार से सम्बंधित विधा है ।"


3) सीले के शब्दों में , " राजनीति विज्ञान के अंतर्गत शासन - व्यवस्था का उसी प्रकार अनुशीलन किया जाता हैं जिस प्रकार अर्थशास्त्र मे धन का, प्राणीशास्त्र मे जीव का ,बीज गणित में अंको का एवं रेखा गणित में स्थान तथा दुरी का "

राज्य व सरकार से संबंधित अध्ययन :-

पॉल जेनेट ,गिलक्राइस्ट ,गेटेल आदि

1) पॉल जेनेट के शब्दों में, "  राजनीति विज्ञान समाज विज्ञानों का वह अंग है जिसमें राज्य के आधार पर सरकार के सिध्दांतोंंका अध्ययन किया जाता है ।"

2)गिलक्राइस्ट के शब्दों में , " राजनीति शास्त्र राज्य और सरकार की सामान्य समस्याओं का अध्ययन करता है । "

राजनीति विज्ञान का क्षेत्र : परम्परागत दृष्टिकोण:-


परम्परागत राजनीति विज्ञान के अध्ययन की विषयवस्तु राज्य है ।
गार्नर के अनुसार राजनीति विज्ञान का क्षेत्र : 
(1)राज्य की उत्पत्ति और उसकी प्रकृति का ज्ञान प्राप्त करना।
(2) राजनीतिक संस्थाओं की प्रकृति ,उनका विकास एवं उनके विविध स्वरूपों का अध्ययन 
(3) जहाँ तक संभव हो सके,इनके आधार पर राजनीतिक प्रकृति और विकास के नियमों का निर्धारण करना है ।

गुडनावं के अनुसार
(1) राज्य की इच्छा का निर्माण 
(2) राज्य की इच्छा की अभिव्यक्ति 
(3) राज्य की इच्छा की कार्यान्वित है।

फेडरिक पोलक ने राजनीति विज्ञान के क्षेत्र को दो खण्डों में विभाजित किया है - (1) सैध्दांतिक राजनीति (2) व्यवहारिक राजनीति

विलोबी के अनुसार :- राज्य, शासन तथा विधि का अध्ययन है।
सिजविक के अनुसार :- (1) राज्य के संगठन से संबंधित (2) राज्य के.कार्यो से.संबंधित।

1948 में यूनेस्कों के तत्वावधान में आयोजित राजनीति शास्त्रियों का के पेरिस सम्मेलन के अनुसार

(1) राजनीतिक सिद्धांत
(2) राजनीतिक संस्थाएं
(3) दल ,समूह तथा जनमत
(4) अन्तर्राष्ट्रीय संम्बंध

परम्परागत राजनीति विज्ञान की अध्ययन पध्दतियां: -


(1) दार्शनिक पध्दति - प्लेटो ,थॉमस मोर ,रूसो, हीगल, ग्रीन, बोंसाँके, आदि।


(2)ऐतिहासिक पध्दति:-
मेकियावली, बोंदा,माण्टेस्क्यु, बर्क आदि।


(3) तुलनात्मक पध्दति:-
माण्टेस्क्यु, लार्ड ब्राईस, डी-टाकविली,आदि ।

(4) विधि पध्दति :- विलोबी ,डिग्विट आदि।


परम्परागत राजनीति विज्ञान की विशेषताए 


(1)कल्पनात्मक और आदर्शी 

(2)अपरिष्कृत पध्दतियाँँ

(3)नैतिक और राजनीतिक मूल्यों पर विशेष बल

(4) राज्य एक नैतिक सस्था

(5) कानुनी औपचारिक अध्ययन पर बल
(6) संकुचित अध्ययन

(7) दर्शनशास्त्र से प्रभावित

(8) व्यक्ति निष्ठ अध्ययन पर बल


महत्वपूर्ण बुक्स 

(1) संत ऑगस्टाइन    - दि सिटी ऑफ गॉड 
(2) हेराल्ड जे. लास्की - ए ग्रामर ऑफ पॉलिटिक्स
(3) प्लेटो                   - रिपब्लिक
(4)  अरस्तू                -  पॉलिटिक्स

(5)थामस मोर           - यूटोपिया

(6) मैकियावेली          - द  प्रिन्स





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